नई दिल्ली:
भारतीय रुपये (INR) में गिरावट का सिलसिला जारी है और गुरुवार को यह डॉलर के मुकाबले ₹90 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। वैश्विक बाज़ार में डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबावों ने रुपये को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
- 📉 रुपया क्यों गिर रहा है? जानिए प्रमुख कारण
- 1️⃣ अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती
- 2️⃣ विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली
- 3️⃣ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
- 4️⃣ भूराजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions)
- 💶 रुपया कहाँ तक गिर सकता है? क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
- 📊 गिरावट का असर भारत और आम जनता पर
- ✔️ आयात महंगा होगा
- ✔️ विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ेगा
- ✔️ IT कंपनियों को राहत
- ✔️ मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का खतरा
- 🏦 RBI की क्या भूमिका?
- 🧩 निष्कर्ष
📉 रुपया क्यों गिर रहा है? जानिए प्रमुख कारण
1️⃣ अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती
हाल के हफ्तों में अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने के संकेतों से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। इसका सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर पड़ा है, जिसमें रुपया भी शामिल है।
2️⃣ विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली
भारत के शेयर बाजार से FII की तगड़ी निकासी की वजह से डॉलर की मांग बढ़ी है। जब विदेशी निवेशक पैसा बाहर निकालते हैं, तो वे रुपये की जगह डॉलर खरीदते हैं — इससे रुपया कमजोर होता है।
3️⃣ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
क्रूड ऑयल की कीमत 80–90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारत का आयात बिल बढ़ा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इसलिए तेल महंगा होने से रुपये पर दबाव आता है।
4️⃣ भूराजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions)
मध्य-पूर्व और यूरोप में बढ़ते तनावों ने ग्लोबल मार्केट को अस्थिर किया है। अनिश्चितता के दौर में निवेशक डॉलर और सोने को “सेफ हेवन” मानते हैं, जिससे कमजोर मुद्राओं पर दबाव पड़ता है।
💶 रुपया कहाँ तक गिर सकता है? क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अंतरराष्ट्रीय वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ महीनों में रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अनुमान लगाया है कि:
यदि डॉलर इंडेक्स 108+ तक जाता है, तो रुपया ₹91–₹92 प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है।
हालांकि, आरबीआई (RBI) द्वारा बाज़ार में हस्तक्षेप के संकेत भी मिल रहे हैं, जिससे अचानक तेज गिरावट पर लगाम लग सकती है।
📊 गिरावट का असर भारत और आम जनता पर
✔️ आयात महंगा होगा
तेल, गैजेट, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेशी मशीनरी महंगी होती जाएगी।
✔️ विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ेगा
स्टूडेंट्स, टूरिस्ट्स और कंपनियों को डॉलर में भुगतान करना पड़ता है — रुपया कमजोर होगा तो खर्च बढ़ेगा।
✔️ IT कंपनियों को राहत
भारत की IT और सॉफ्टवेयर कंपनियां डॉलर में कमाई करती हैं, इसलिए इन्हें लाभ होगा।
✔️ मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का खतरा
आयातित वस्तुएं महंगी होने से महंगाई बढ़ सकती है।
🏦 RBI की क्या भूमिका?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने पिछले कुछ दिनों में विदेशी मुद्रा बाज़ार में डॉलर बेचकर रुपये को स्थिर करने की कोशिश की है।
हालाँकि, RBI ने संकेत दिया है कि वे “कृत्रिम स्थिरता” नहीं बनाएंगे बल्कि केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करेंगे।
🧩 निष्कर्ष
रुपये की डॉलर के मुकाबले गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, लेकिन यह पूरी तरह अप्रत्याशित भी नहीं है।
ग्लोबल मार्केट की स्थिति, क्रूड ऑयल के दाम और FII मूवमेंट आने वाले हफ्तों में रुपये की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल बाज़ार रुपया-डॉलर में ₹90 के पार जाने की संभावना पर नज़र बनाए हुए है।
